8 अप्रैल 2026
भारत में माता या पिता के निधन के बाद कौन से कागज़ात चाहिए: पूरी सूची
माता या पिता के निधन के बाद एक भारतीय परिवार को कौन से कागज़ात और कौन से फॉर्म चाहिए, इसकी पूरी सूची, आसान भाषा में। इसमें LIC, EPF, PPF, बैंक खाते, ज़मीन जायदाद और निवेश शामिल हैं।
माता या पिता को खोना अपने आप में बहुत भारी होता है, और ऊपर से कागज़ों की भूलभुलैया। फिर भी उसके बाद के हफ्तों में एक के बाद एक संस्था परिवार से एक के बाद एक कागज़ और एक के बाद एक फॉर्म मांगती रहती है।
यह पूरी सूची है: हर संपत्ति, उसके लिए ज़रूरी कागज़ात, और कौन सा फॉर्म कहां जमा करना है। एक बार में एक हिस्सा लीजिए, और इसे ऐसी जगह रखिए जहां आपको यह दोबारा मिल जाए।
मृत्यु प्रमाण पत्र और बुनियादी कागज़ात
सब कुछ यहीं से शुरू होता है। इनके बिना आगे कुछ नहीं बढ़ता।
| कागज़ | किस काम के लिए ज़रूरी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र (कई प्रतियां) | हर दावे के लिए |
| दिवंगत व्यक्ति का Aadhaar और PAN | हर वित्तीय दावे के लिए |
| दावा करने वाले का Aadhaar और PAN | पहचान की जांच के लिए |
| दावा करने वाले के पते का प्रमाण | KYC के लिए |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो | फॉर्म और अर्ज़ियों के लिए |
| दावा करने वाले के बैंक खाते की जानकारी | पैसा पाने के लिए |
मृत्यु प्रमाण पत्र की 10 से 15 प्रमाणित प्रतियां बनवा लीजिए। लगभग हर संस्था एक प्रति मांगती है, और वापस बहुत कम ही करती है।
ज़रूरी बात। ध्यान रखिए कि Aadhaar, PAN और सभी वित्तीय कागज़ों में नाम की वर्तनी एक जैसी हो। ज़रा सा फर्क भी लंबी देरी करा देता है।
LIC मृत्यु दावे के कागज़ात और फॉर्म
LIC पॉलिसी उन चीज़ों में से है जिनका दावा परिवारों को सबसे ज़्यादा करना पड़ता है।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| असली पॉलिसी बॉन्ड | अनिवार्य |
| मृत्यु प्रमाण पत्र | प्रमाणित प्रति |
| दावा करने वाले की पहचान का प्रमाण | Aadhaar या PAN |
| NEFT की जानकारी (रद्द किया हुआ चेक) | भुगतान पाने के लिए |
| Claimant’s Statement (Form 3783) | दावे का मुख्य फॉर्म |
फॉर्म और प्रक्रिया
- Claimant’s Statement (Form 3783) नॉमिनी भरता है। यह किसी भी LIC शाखा में मिल जाता है, या licindia.in से डाउनलोड किया जा सकता है।
- इसे नज़दीकी LIC शाखा में जमा कीजिए, या LIC portal के ज़रिए ऑनलाइन भेजिए।
अगर पॉलिसी शुरू होने के 3 साल के भीतर मृत्यु हुई है, तो LIC कुछ और कागज़ मांग सकती है, जैसे इलाज के रिकॉर्ड।
सुझाव। अगर पॉलिसी का कागज़ नहीं मिल रहा, तब भी आप क्षतिपूर्ति बॉन्ड (indemnity bond) देकर दावा कर सकते हैं।
EPF और PF मृत्यु दावे के कागज़ात और फॉर्म
अगर आपके माता या पिता नौकरी करते थे, तो EPF (भविष्य निधि) का खाता मायने रखता है।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| UAN (Universal Account Number) | खाता ढूंढने के लिए ज़रूरी |
| UAN से जुड़ा Aadhaar | जुड़ा होना ज़रूरी है |
| नॉमिनी के बैंक खाते की जानकारी | पैसा भेजने के लिए |
| नियोक्ता की जानकारी | कभी कभी मांगी जाती है |
कौन से फॉर्म जमा करने हैं
- मृत्यु के बाद PF निकालने के लिए Form 20
- पेंशन के दावे के लिए Form 10-D
- EDLI बीमा के दावे के लिए Form 5IF
इन्हें EPFO portal के ज़रिए जमा कीजिए, या खुद जाकर क्षेत्रीय दफ्तर में दीजिए।
ज़रूरी बात। अगर Aadhaar, UAN से नहीं जुड़ा था, तो ऑनलाइन दावा अटक सकता है और आपको EPFO दफ्तर जाना पड़ेगा।
मृत्यु के बाद PPF खाता बंद कराना
PPF खाते बैंक या डाकघर संभालते हैं।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| PPF खाते की जानकारी | पासबुक या खाता संख्या |
| दावे का फॉर्म (Form G) | खाता बंद कराने के लिए |
| नॉमिनी की पहचान का प्रमाण | ज़रूरी |
मुख्य नियम
- अगर कोई नॉमिनी नहीं है, तो ₹1 लाख तक की रकम बिना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (succession certificate) के ली जा सकती है।
- उससे ज़्यादा रकम पर कानूनी प्रमाण मांगा जा सकता है।
जिस बैंक या डाकघर में खाता है, वहीं जमा कीजिए।
बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉज़िट
यहीं ज़्यादातर परिवार उलझते हैं, सिर्फ इसलिए कि खाते बहुत सारे होते हैं।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| खाते की जानकारी | पासबुक या स्टेटमेंट |
| नॉमिनी की पहचान का प्रमाण | अगर नॉमिनी दर्ज है |
| दावे का फॉर्म (हर बैंक का अपना) | ज़रूरी |
प्रक्रिया
- शाखा में जाइए।
- दावे का फॉर्म और कागज़ात जमा कीजिए।
- रकम नॉमिनी के खाते में भेज दी जाती है।
अगर कोई नॉमिनी नहीं है, तो बैंक कानूनी वारिस प्रमाण पत्र (legal heir certificate) भी मांग सकते हैं, और बड़ी रकम के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र।
सुझाव। RBI के UDGAM portal पर देखिए, कहीं आपके माता या पिता की कोई बिना दावे वाली बैंक जमा तो नहीं छूट गई।
संपत्ति अपने नाम कराने (mutation) के कागज़ात
पूरी प्रक्रिया में सबसे ज़्यादा कागज़ ज़मीन जायदाद में लगते हैं।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| बैनामा या मालिकाना दस्तावेज़ | मालिकाना हक का प्रमाण |
| खाता या संपत्ति कर के रिकॉर्ड | स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड |
| कानूनी वारिस प्रमाण पत्र | जब एक से ज़्यादा वारिस हों |
| दूसरे वारिसों से NOC | कई मामलों में ज़रूरी |
प्रक्रिया
- स्थानीय नगर निगम या राजस्व दफ्तर में mutation (दाखिल खारिज) के लिए अर्ज़ी दीजिए।
- कागज़ात और अर्ज़ी जमा कीजिए।
- संपत्ति के रिकॉर्ड में वारिसों के नाम चढ़ जाते हैं।
सावधानी। ज़मीन जायदाद के झगड़े अक्सर मालिकाना हक साफ न होने या वसीयत न होने से खड़े होते हैं। संभलकर आगे बढ़िए, और कोई बड़ी बात हो तो कानूनी मदद ज़रूर लीजिए।
demat और म्यूचुअल फंड का transmission
निवेश के लिए अपनी अलग प्रक्रिया होती है, जिसे transmission कहते हैं।
ज़रूरी कागज़ात
| कागज़ | जानकारी |
|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| DP ID और Client ID | demat खाते के लिए |
| म्यूचुअल फंड का folio number | म्यूचुअल फंड के लिए |
| दावा करने वाले का KYC | ज़रूरी |
| Transmission request form | अनिवार्य |
कहां जमा करना है
- demat: ब्रोकर या depository participant (जैसे Zerodha या ICICI Direct)।
- म्यूचुअल फंड: फंड हाउस या रजिस्ट्रार (CAMS या KFintech)।
अगर कोई नॉमिनी दर्ज ही न हो
यहां बात पेचीदा हो जाती है।
अगर कोई नॉमिनी नहीं है, तो आमतौर पर ये चाहिए होंगे:
- कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
- उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (बड़ी संपत्तियों के लिए)
- एक शपथ पत्र और एक क्षतिपूर्ति बॉन्ड
हर संस्था के नियम अलग हैं, पर हर जगह समय ज़्यादा लगेगा, यह मानकर चलिए।
ज़रूरी बात। नॉमिनी हमेशा कानूनी मालिक नहीं होता। ज़्यादातर मामलों में वह सिर्फ एक अमानतदार होता है। आखिरी मालिकाना हक उत्तराधिकार कानून या वसीयत से तय होता है।
पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है
| किस चीज़ का दावा | आमतौर पर लगने वाला समय |
|---|---|
| LIC का दावा | 7 से 30 दिन |
| EPF का दावा | 15 से 45 दिन |
| बैंक खाते | 7 से 20 दिन |
| म्यूचुअल फंड | 10 से 30 दिन |
| संपत्ति का mutation | 30 से 90 दिन |
देरी की वजह लगभग हमेशा यही होती है: कोई कागज़ छूट गया, या नाम मेल नहीं खा रहा।
आम गलतियां, जिनसे बचिए
- मृत्यु प्रमाण पत्र की पर्याप्त प्रतियां न बनवाना।
- छोटे खातों या भूले बिसरे निवेश को नज़रअंदाज़ करना।
- दावा करने से पहले नॉमिनी की जानकारी न जांचना।
- यह मान लेना कि सब कुछ एक ही जगह होगा।
- महीनों तक काम टालते रहना।
यह सूची संभालकर रखिए
- मृत्यु प्रमाण पत्र की 10 से 15 प्रतियां बनवा लीजिए।
- Aadhaar, PAN और बैंक खाते की जानकारी इकट्ठा कीजिए।
- हर संपत्ति की पहचान कीजिए: LIC, EPF, PPF, बैंक, ज़मीन जायदाद, निवेश।
- हर संपत्ति के लिए नॉमिनी की जानकारी जांचिए।
- हर श्रेणी के लिए सही फॉर्म जमा कीजिए।
- अपने दावों पर नज़र रखिए और नियमित रूप से पूछताछ करते रहिए।
- जो भी जमा करें, उसकी एक प्रति अपने पास रखिए।
इस पूरी सूची में सबसे मुश्किल हिस्सा फॉर्म नहीं हैं। सबसे मुश्किल यह पता करना है कि आपके माता या पिता के पास असल में था क्या। एक शांत सी जगह, जहां परिवार अपने खाते, पॉलिसियां और कागज़ात लिखकर रखे, जैसे Parampara, हफ्तों की खोज को एक दोपहर में सूची पढ़ते जाने भर का काम बना देती है।
जो भी हो, आपके परिवार को पता होगा कि कहाँ देखना है।
इस लेख में जिन चीज़ों की बात है, उन सबके लिए Parampara एक निजी, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉल्ट है: पॉलिसियाँ, खाते, वसीयत कहाँ रखी है। हम उसमें कुछ नहीं पढ़ सकते। आपका परिवार पढ़ सकता है, जब ज़रूरत पड़े।
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