16 अप्रैल 2026
पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद LIC पॉलिसी का क्लेम कैसे करें: भारत के लिए पूरी गाइड (2026)
भारत में मृत्यु के बाद LIC पॉलिसी का क्लेम करने की कदम दर कदम गाइड। इसमें ज़रूरी फ़ॉर्म (3783, 3816), लगने वाले दस्तावेज़, समय-सीमा, नॉमिनी न होने पर क्या करना है, और क्लेम खारिज होने के आम कारण शामिल हैं।
जब माता-पिता या जीवनसाथी का देहांत होता है, तो परिवार सबसे पहले अक्सर LIC पॉलिसी का ही क्लेम करता है, और सबसे ज़्यादा घबराहट भी इसी को लेकर होती है। अच्छी बात यह है कि इसकी प्रक्रिया साफ़ तय है। यहाँ पूरी बात सरल शब्दों में है: फ़ॉर्म, दस्तावेज़, समय-सीमा, और अगर नॉमिनी न हो तो क्या करना है।
LIC मृत्यु क्लेम के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये इकट्ठा कर लें।
| दस्तावेज़ | किसके लिए ज़रूरी |
|---|---|
| मूल पॉलिसी बॉन्ड | पॉलिसी का प्रमाण |
| मृत्यु प्रमाणपत्र (प्रमाणित प्रति) | सभी क्लेम |
| क्लेम करने वाले का पहचान प्रमाण (Aadhaar या PAN) | पहचान की जाँच |
| क्लेम करने वाले का पता प्रमाण | KYC |
| रद्द किया हुआ चेक या बैंक की जानकारी | भुगतान |
| मेडिकल रिकॉर्ड (अगर लागू हो) | शुरुआती क्लेम |
| नियोक्ता का प्रमाणपत्र (अगर लागू हो) | कुछ मामलों में |
अगर मूल पॉलिसी दस्तावेज़ खो गया है, तब भी आप इंडेम्निटी बॉन्ड (indemnity bond) देकर आगे बढ़ सकते हैं।
ज़रूरी बात। ध्यान रखें कि हर दस्तावेज़ में नाम और जन्म तारीख़ एक जैसी हो। इनका आपस में मेल न खाना देरी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है।
LIC क्लेम की प्रक्रिया, कदम दर कदम
पहला कदम: LIC को सूचना दें
नज़दीकी LIC शाखा में जाएँ, या LIC की वेबसाइट से ऑनलाइन सूचना दें। उन्हें बुनियादी जानकारी दें:
- पॉलिसी नंबर
- मृतक का नाम
- मृत्यु की तारीख़
आगे क्या करना है, यह वे आपको वहीं बता देंगे।
दूसरा कदम: क्लेम फ़ॉर्म भरें
मुख्य फ़ॉर्म है Form A, जिसे Form 3783 (Claimant’s Statement) भी कहते हैं।
इसे नॉमिनी या क्लेम करने वाला भरता है, और इसमें यह सब आता है:
- पॉलिसी की जानकारी
- मृत्यु का कारण
- क्लेम करने वाले का मृतक से रिश्ता
- क्लेम करने वाले का ब्योरा और बैंक की जानकारी
तीसरा कदम: ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करें
सभी ज़रूरी दस्तावेज़ फ़ॉर्म के साथ लगाएँ और LIC शाखा में जमा कर दें।
कुछ मामलों में, ख़ासकर 3 साल के भीतर वाले शुरुआती क्लेम में, LIC ये भी माँग सकता है:
- अस्पताल के रिकॉर्ड
- डॉक्टर का प्रमाणपत्र
- FIR या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (दुर्घटना से हुई मृत्यु में)
चौथा कदम: LIC की जाँच
LIC देखता है कि पॉलिसी वैध है या नहीं और उसकी स्थिति क्या है, प्रीमियम का भुगतान कैसा रहा, और मृत्यु का कारण क्या था। सब ठीक मिलने पर क्लेम निपटान के लिए आगे बढ़ जाता है। शुरुआती क्लेम में (पॉलिसी शुरू होने के 3 साल के भीतर) LIC अपनी अलग जाँच भी करा सकता है।
पाँचवाँ कदम: क्लेम का निपटान
मंज़ूरी मिलते ही रकम सीधे नॉमिनी या क्लेम करने वाले के बैंक खाते में NEFT से आ जाती है। IRDAI के नियमों के अनुसार, सारे दस्तावेज़ मिलने के 30 दिनों के भीतर LIC को क्लेम निपटाना होता है।
LIC के क्लेम फ़ॉर्म, आसान भाषा में
| फ़ॉर्म | आधिकारिक नंबर | किसलिए |
|---|---|---|
| Form A (Claimant’s Statement) | 3783 | मुख्य मृत्यु क्लेम फ़ॉर्म, जिसे नॉमिनी या क्लेम करने वाला भरता है |
| Form B (Medical Attendant’s Certificate) | 3784-B | उस डॉक्टर से, जिसने मृतक का आख़िरी इलाज किया |
| Form B1 (Certificate of Hospital Treatment) | 3816 | अगर मृत्यु अस्पताल में हुई हो |
| Form C (Identity and Disposal Certificate) | 3785 | पहचान और अंतिम संस्कार या दफ़नाने की पुष्टि करता है |
| Form E (Employer’s Certificate) | 3787 | अगर मृत्यु के समय व्यक्ति नौकरी में था |
हर क्लेम में हर फ़ॉर्म की ज़रूरत नहीं होती:
- 3 साल के बाद स्वाभाविक मृत्यु: आम तौर पर सिर्फ़ Form A (3783) और बुनियादी दस्तावेज़।
- 3 साल के भीतर मृत्यु: मेडिकल फ़ॉर्म भी लगते हैं, यानी Form B (3784-B) और Form B1 (3816)।
- दुर्घटना से मृत्यु: FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस पंचनामा ज़रूरी हैं।
सुझाव। फ़ॉर्म किसी भी LIC शाखा में या licindia.in पर मिल जाते हैं। शाखा प्रबंधक से पूछ लें। वे आपको ठीक-ठीक बता देंगे कि आपके मामले में कौन से फ़ॉर्म लगेंगे।
अगर कोई नॉमिनी न हो
अगर पॉलिसी पर कोई नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो कागज़ी काम बढ़ जाता है। आपको ये चाहिए होंगे:
- कानूनी वारिस प्रमाणपत्र (legal heir certificate), जो तहसीलदार या अदालत से मिलता है
- बड़ी रकम के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (succession certificate), जो सिविल कोर्ट से मिलता है
- इंडेम्निटी बॉन्ड, जो LIC को आगे आने वाले दावों से सुरक्षित रखता है
- स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र
जाँच पूरी होने के बाद LIC यह रकम कानूनी वारिसों को दे देता है।
ज़रूरी बात। नॉमिनी होने पर भी वह Insurance Act के तहत एक ट्रस्टी की तरह ही काम करता है। पैसा आख़िर में किसका है, यह वसीयत (Will) या परिवार पर लागू होने वाले उत्तराधिकार कानून तय करते हैं।
LIC को निपटाने में कितना समय लगता है
| स्थिति | समय |
|---|---|
| सीधा क्लेम (नॉमिनी मौजूद, 3 साल के बाद मृत्यु) | 7 से 15 दिन |
| शुरुआती क्लेम (3 साल के भीतर मृत्यु) | 30 से 90 दिन |
| उलझे मामले (नॉमिनी नहीं, या विवाद) | 60 से 180 दिन |
IRDAI के नियमों के अनुसार, जो क्लेम शुरुआती नहीं हैं, उन्हें पूरे दस्तावेज़ मिलने के 30 दिनों के भीतर LIC को निपटाना होता है। इससे ज़्यादा समय लगने पर देरी का ब्याज भी देना पड़ता है।
सुझाव। अगर आपका क्लेम 30 दिनों से ज़्यादा अटका है, तो मामला LIC Zonal Office तक ले जाएँ, या IRDAI की शिकायत प्रणाली (IGMS) पर igms.irda.gov.in से शिकायत दर्ज करें।
क्लेम खारिज होने के आम कारण
- पॉलिसी लेते समय पहले से चली आ रही किसी बीमारी को छिपाना।
- प्रीमियम न भरने से पॉलिसी का बंद हो जाना (क्लेम करने से पहले देख लें कि उसे दोबारा चालू किया जा सकता है या नहीं)।
- प्रपोज़ल फ़ॉर्म में अहम जानकारी ग़लत देना (उम्र, आमदनी, आदतें)।
- धोखाधड़ी वाले क्लेम।
- दस्तावेज़ों का न होना, या उनमें आपस में मेल न होना।
- ऐसे कारण से मृत्यु जो पॉलिसी में शामिल नहीं है (जैसे पहले साल के भीतर आत्महत्या, Section 45 के तहत)।
सावधान। शुरुआती क्लेम, यानी पॉलिसी शुरू होने के 3 साल के भीतर वाले क्लेम, की जाँच बहुत बारीकी से होती है। अगर सचमुच कोई जानकारी छिपाई गई थी, तब भी क्लेम मिल सकता है, बस छिपाए गए जोखिम का प्रीमियम काटकर। शाखा प्रबंधक से बात करें।
इसे आसान बनाने के सुझाव
- पॉलिसी बॉन्ड ऐसी जगह रखें जो घरवालों को पता हो और आसानी से मिल जाए।
- LIC को जितनी जल्दी हो सके सूचना दें। देर न करें।
- जमा करने से पहले फ़ॉर्म की हर जानकारी और हर प्रति दोबारा जाँच लें।
- जो कुछ भी जमा करें, उसकी फ़ोटोकॉपी अपने पास रखें।
- क्लेम की रसीद का नंबर लिख लें।
- कोई ख़बर न मिले तो हर 7 से 10 दिन में पूछताछ करते रहें।
सहेजने लायक चेकलिस्ट
- LIC पॉलिसी का दस्तावेज़ ढूँढ़ें, या पॉलिसी नंबर लिख लें।
- मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रतियाँ लें (कम से कम 5)।
- क्लेम करने वाले का पहचान प्रमाण और बैंक की जानकारी इकट्ठा करें।
- Form A / Form 3783 (Claimant’s Statement) ठीक से भरें।
- सभी सहायक दस्तावेज़ साथ लगाएँ।
- LIC शाखा में जमा करें और रसीद ले लें।
- क्लेम की स्थिति licindia.in पर देखें, या 1800-103-1313 (टोल-फ़्री) पर फ़ोन करें।
- 15 दिनों में कोई जवाब न आए तो फिर से संपर्क करें।
असली सीख
LIC का क्लेम करते समय एक बात बिलकुल साफ़ हो जाती है: सबसे मुश्किल घड़ी में दस्तावेज़ ढूँढ़ना बहुत तकलीफ़देह होता है, और इससे सब कुछ धीमा पड़ जाता है।
इसी वजह से हमने Parampara बनाया: एक निजी तिजोरी, जहाँ परिवार अपनी LIC पॉलिसी, नॉमिनी, प्रीमियम का ब्योरा और बाक़ी हर ज़रूरी दस्तावेज़ रखता है, ताकि मुश्किल वक़्त में किसी को कुछ ढूँढ़ना न पड़े। शुरू करना मुफ़्त है।
जो भी हो, आपके परिवार को पता होगा कि कहाँ देखना है।
इस लेख में जिन चीज़ों की बात है, उन सबके लिए Parampara एक निजी, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉल्ट है: पॉलिसियाँ, खाते, वसीयत कहाँ रखी है। हम उसमें कुछ नहीं पढ़ सकते। आपका परिवार पढ़ सकता है, जब ज़रूरत पड़े।
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